चिन्तनाद्यस्य तत्वस्य रसज्ञा -  श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (1)

चिन्तनाद्यस्य तत्वस्य रसज्ञा - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (1)

चिन्तनाद्यस्य तत्वस्य रसज्ञाः सारभागिनः । 
प्राप्नुवन्ति परां भक्तिं तद्वन्दे राधिकापदम् ॥ 
-  श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (1)

जिन चरणों [रस के सार तत्व] का चिंतन करने से रस के पूर्ण ज्ञाता (अर्थात रसिक प्रेमी जन) भक्ति की पराकाष्ठा को प्राप्त करते हैं, ऐसे श्री राधा के चरणों को मैं प्रणाम करता हूँ ।