वंशीवट के निकट हरि रास रच्यौ - श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (255)

वंशीवट के निकट हरि रास रच्यौ - श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (255)

(राग अडानो)
वंशीवट के निकट हरि रास रच्यौ मोर मुकट और ओढैं पीत पट ।
वृन्दावन नव कुँज सघन घन सुभग पुलिन अरु जमुना के तट ।। [1]
आलस भरे उनीदे दोऊ जन श्री राधा प्यारी और नागर नट । 
व्यास रसिक बलि रीझि रीझि कैं लेत वलैया कर अँगुरिन चट ।। [2] 
- श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (255)

वंशीवट के निकट श्री हरि ने मोर मुकुट एवं पीले वस्त्रों को धारण कर रास रचाया। पुनः श्री यमुना जी के सुंदर तट पर, वृंदावन की सघन कुंजों में युगल वर श्री प्रियतम प्यारी आलस में भर उनींदे हो जाते हैं । श्री हरिराम व्यास इस अद्भुत छवि को निहार कर अति संतुष्टता एवं प्रसन्नता में भर कर श्री राधा कृष्ण पर बलिहार जा रहे हैं।