पीत्वा मुखाम्बुज श्री मकरंदामृतमनन्यभावरतिः ।
वाञ्छति निपत्यपदयोः राधायाः श्यामलस्तर्षाम् ॥
- श्री वृषभानुपुर शतक (15), श्री वंशी अली द्वारा रचित
श्री राधिका किशोरी जू के प्रति अनन्य भाव रखने वाले श्रीकृष्ण, स्वामिनी के मुखकमल से निःसृत मकरन्द रूप अमृत का पान करके उनके श्रीचरणों में गिरकर अपनी पिपासा को और अधिक करने की इच्छा करते हैं ।
वाञ्छति निपत्यपदयोः राधायाः श्यामलस्तर्षाम् ॥
- श्री वृषभानुपुर शतक (15), श्री वंशी अली द्वारा रचित
श्री राधिका किशोरी जू के प्रति अनन्य भाव रखने वाले श्रीकृष्ण, स्वामिनी के मुखकमल से निःसृत मकरन्द रूप अमृत का पान करके उनके श्रीचरणों में गिरकर अपनी पिपासा को और अधिक करने की इच्छा करते हैं ।

