किशोरी मेरी ये अभिलाष पुराओ ।
तुम पौढो सुभग सेज पर, मोसे चरण चपाओ ।। [1]
मैं उंगरी चटकाऊ सुंदरी तुम हिय हरष बढाओ ।
प्रेम सखी कह कह प्रशंस रीझ रीझ सुख पाऊं ।। [2]
- श्री प्रेम सखी
हे किशोरी जी, मेरी यह अभिलाष पूर्ण कर, मुझे सेवा का सुख प्रदान करिए । आप सुंदर शैया पर विश्राम करिए एवं मैं आपके चरणों की प्रेम पूर्वक सेवा करूँ । [1]
हे सुंदरी, मैं आपकी उंगलियों को चटकाऊँ, आप मेरे हृदय में सेवा सुख को बढ़ा दीजिए । श्री प्रेम सखी कहती हैं कि आपके गुणों को गा गा कर, आपकी प्रशंसा गान कर [रीझ रीझ] कर सुख पाऊँ । [2]
तुम पौढो सुभग सेज पर, मोसे चरण चपाओ ।। [1]
मैं उंगरी चटकाऊ सुंदरी तुम हिय हरष बढाओ ।
प्रेम सखी कह कह प्रशंस रीझ रीझ सुख पाऊं ।। [2]
- श्री प्रेम सखी
हे किशोरी जी, मेरी यह अभिलाष पूर्ण कर, मुझे सेवा का सुख प्रदान करिए । आप सुंदर शैया पर विश्राम करिए एवं मैं आपके चरणों की प्रेम पूर्वक सेवा करूँ । [1]
हे सुंदरी, मैं आपकी उंगलियों को चटकाऊँ, आप मेरे हृदय में सेवा सुख को बढ़ा दीजिए । श्री प्रेम सखी कहती हैं कि आपके गुणों को गा गा कर, आपकी प्रशंसा गान कर [रीझ रीझ] कर सुख पाऊँ । [2]

![किशोरी मेरी ये अभिलाष पुराओ- श्री प्रेम सखी [श्री लाल बलबीर जी के भ्राता]](https://images.brajrasik.org/6083d3fbee05710009e98327-m.jpeg)