वन्देऽहं सच्चिदानन्दं कृष्णं - श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (2)

वन्देऽहं सच्चिदानन्दं कृष्णं - श्री विट्ठलनाथ (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (2)

वन्देऽहं सच्चिदानन्दं कृष्णं तं कमलेक्षणम्।
योविरहति नातृतः राधाऽधरसुधानिधौ ॥

-  श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामिनी जी ध्यानम् (2)

मैं उन कमल नयन सच्चिदानन्दं श्री कृष्ण को प्रणाम करता हूँ जो श्री राधिका के अधर रूपी सुधा निधि का पान कर [एवं अभिलाषा कर] कभी भी पूर्ण संतुष्टि को प्राप्त नहीं करते ।