नारायण होवै भलें, जो कछु होवन हार।
हरिसों प्रीति लगायके, अब कहा सोच विचार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (125)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि जब भगवान श्री हरि से प्रीति लगा ली, तब अब जो कुछ होना है, सो हो जाए—फिर क्यों सोच-विचार करता है? [अर्थात् जो कुछ होगा, वह भला ही होगा।]

