(राग मलार)
हिंडोरेंब झूलत लाल दिन दूलहु
दुलहिनि बिहारिनि देखौ री ललना ।
गौर स्याम छबि अति दुति बहु भाँति री बलना ॥ [1]
नीलांबर पीतांबर अंचल चलत धुजा फरहराति कलना ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी बिहारिनि अविचलना ॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (88)
सखी सखी से कह रही है- सखी देख! निकुंज के सुख पुंज महल में दोनों प्रिया प्रियतम हिंडोले में प्रेम रूपी रूपी डोरी से बंधे अंग संग दुल्हा दुलहिन बने झूल रहे हैं।
गौर श्याम की यह दिव्य छवि की अति दिव्य कांतिमय है जिसे निहार कर मैं बहुत भाँति से इस दिव्य जोड़ी पर बलिहार जा रही हूँ। [1]
झूला झूलते श्री राधा के नीलांबर एवं श्री कृष्ण के पीताम्बर का आँचल ऐसे फहरा रहा है जैसे कोई नित्य ध्वजा [नील पीत] फहरा रही हो।
ललिता अवतार श्री हरिदास के स्वामी श्यामा एवं कुंजबिहारी का यह नित्य विहार अविचल [नित्य] है । [2]
हिंडोरेंब झूलत लाल दिन दूलहु
दुलहिनि बिहारिनि देखौ री ललना ।
गौर स्याम छबि अति दुति बहु भाँति री बलना ॥ [1]
नीलांबर पीतांबर अंचल चलत धुजा फरहराति कलना ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी बिहारिनि अविचलना ॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (88)
सखी सखी से कह रही है- सखी देख! निकुंज के सुख पुंज महल में दोनों प्रिया प्रियतम हिंडोले में प्रेम रूपी रूपी डोरी से बंधे अंग संग दुल्हा दुलहिन बने झूल रहे हैं।
गौर श्याम की यह दिव्य छवि की अति दिव्य कांतिमय है जिसे निहार कर मैं बहुत भाँति से इस दिव्य जोड़ी पर बलिहार जा रही हूँ। [1]
झूला झूलते श्री राधा के नीलांबर एवं श्री कृष्ण के पीताम्बर का आँचल ऐसे फहरा रहा है जैसे कोई नित्य ध्वजा [नील पीत] फहरा रही हो।
ललिता अवतार श्री हरिदास के स्वामी श्यामा एवं कुंजबिहारी का यह नित्य विहार अविचल [नित्य] है । [2]

