राधिका पायके सेन सबै, झपटी मनमोहन पै वृजनारी। [1]
छीन पीताम्बर कामरिया, पहिराई कसूमी सुन्दर सारी॥ [2]
आँखन काजर पाऊँ महावर, साँवरौ नैनन खात हा हा री। [3]
भानु लली की गली में अलीन, भली विधि नाच नचायौ विहारी॥ [4]
- ब्रज के सेवैयाँ
श्री राधिका की आज्ञा पाकर सभी सखियाँ अचानक मनमोहन श्रीकृष्ण पर झपट पड़ीं। [1]
उन्होंने श्रीकृष्ण का पीताम्बर और कमरिया (ऊपरी वस्त्र) छीन लिया और उन्हें कसूम्बी रंग की सुंदर साड़ी पहना दी। [2]
फिर उनकी आँखों में काजल लगाया, पैरों में महावर लगाया, और सखियाँ साँवरे की ओर देखकर हँसती ही चली गईं। [3]
तत्काल सखियों ने श्रीकृष्ण को पकड़ वृषभानु लली (राधा) की गली में ले गईं, जहाँ श्रीकृष्ण को अद्भुत ढंग से नाच नचाया। [4]

