कौवेरी धनसम्पदस्ति किमतो - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.49)

कौवेरी धनसम्पदस्ति किमतो - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.49)

कौवेरी धनसम्पदस्ति किमतो वाचस्पतेर्वाग्मिता
लब्धा किं नु ततों महेन्द्रभवनैश्वर्यं स्थितं किं ततः?
किं कन्दर्पवपुः श्रियाद्भुततपोयोगादि- सिद्ध्या च किं
श्रीवृन्दावन-नाम-धाम-विमुखे सर्वो विडम्बो यतः ।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.49)

यदि कुबेर का धन प्राप्त हो जाये, तो उसका क्या फल? यदि बृहस्पति जैसी सुवाणी प्राप्त हो, तो उससे क्या? महेन्द्र के लोक का ऐश्वर्य मिले, तो उससे क्या लाभ? कामदेव जैसा सुन्दर शरीर मिले तो क्या ? तपस्या, योगादि की सिद्धि से कया प्रयोजन? क्योंकि श्रीवृन्दावन-नामक धाम से जो व्यक्ति विमुख है, उसी के लिये ये सब विडम्बना मात्र हैं।