सर्वदा सर्वभावेन भजनीयो - श्री वल्लभाचार्य, चतुः श्लोकी (1)

सर्वदा सर्वभावेन भजनीयो - श्री वल्लभाचार्य, चतुः श्लोकी (1)

सर्वदा सर्वभावेन भजनीयो व्रजाधिपः । 
स्वस्यायमेव धर्मोहि नान्यः क्वापि कदाचन ।। 
- श्री वल्लभाचार्य, चतुः श्लोकी (1)

ब्रजेश्वर श्री कृष्ण को सर्व भाव से सर्वदा भजन करना चाहिए । यह ही तुम्हारा एकमात्र धर्म है । इसके अतिरिक्त अन्य कोई दूसरा धर्म नहीं है ।