स्थान:
वृंदावन में मोटा गणेश मंदिर, वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के पास अठखंबा में स्थित है।
दिव्य लीला:
ब्रज के पूरे क्षेत्र में, यह एकमात्र स्थान है जहाँ स्वयं सिद्ध श्री मोटे गणेश जी के दर्शन होते हैं। भगवान गणेश जिनकी सीधी सूंड होती है और जो सिंदूर से निर्मित होते हैं, उन्हें हाई सिद्ध गणेश के रूप में जाना जाता है। वृंदावन के मोटा गणेश द्वापर युग के समय से जाने जाते हैं जब साक्षात श्री कृष्ण भी इस धराधाम में थे। द्वापर युग में यह चार भुजाओं और सिंदूर के साथ प्रकट हुए, हर बुधवार को जिन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है।
जैसा कि अन्य स्थानों के गणेश जी के स्वरुप हैं, चाहे सिद्धि विनायक या अन्य जगह के हों, उन सभी के दर्शन में गणेश जी के हाथ वरदान देते हुए रहते हैं ।परन्तु इस वृंदावन के यह मोटे गणेश के दोनों हाथ अपनी जांघों पर है, जिसका अर्थ है कि वह वृंदावन को कभी भी नहीं छोड़ना चाहते हैं। उनकी एकमात्र इच्छा श्री राधा रानी और श्री कृष्ण की दिव्य लीला को देखना है। जो भी मोटा गणेश के दर्शन करने की इच्छा रखता है, उसे वृंदावन जाना चाहिए, वह यहां से एक कदम भी नहीं बढ़ाते। ब्रज के मोटा गणेश, नरसिंह देव, एवं दाऊजी, आदि सभी श्री राधारानी की इच्छा एवं आज्ञा अनुसार ही गोलोक धाम से अवतरित हुए हैं।
वृंदावन में मोटा गणेश मंदिर, वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के पास अठखंबा में स्थित है।
दिव्य लीला:
ब्रज के पूरे क्षेत्र में, यह एकमात्र स्थान है जहाँ स्वयं सिद्ध श्री मोटे गणेश जी के दर्शन होते हैं। भगवान गणेश जिनकी सीधी सूंड होती है और जो सिंदूर से निर्मित होते हैं, उन्हें हाई सिद्ध गणेश के रूप में जाना जाता है। वृंदावन के मोटा गणेश द्वापर युग के समय से जाने जाते हैं जब साक्षात श्री कृष्ण भी इस धराधाम में थे। द्वापर युग में यह चार भुजाओं और सिंदूर के साथ प्रकट हुए, हर बुधवार को जिन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है।
जैसा कि अन्य स्थानों के गणेश जी के स्वरुप हैं, चाहे सिद्धि विनायक या अन्य जगह के हों, उन सभी के दर्शन में गणेश जी के हाथ वरदान देते हुए रहते हैं ।परन्तु इस वृंदावन के यह मोटे गणेश के दोनों हाथ अपनी जांघों पर है, जिसका अर्थ है कि वह वृंदावन को कभी भी नहीं छोड़ना चाहते हैं। उनकी एकमात्र इच्छा श्री राधा रानी और श्री कृष्ण की दिव्य लीला को देखना है। जो भी मोटा गणेश के दर्शन करने की इच्छा रखता है, उसे वृंदावन जाना चाहिए, वह यहां से एक कदम भी नहीं बढ़ाते। ब्रज के मोटा गणेश, नरसिंह देव, एवं दाऊजी, आदि सभी श्री राधारानी की इच्छा एवं आज्ञा अनुसार ही गोलोक धाम से अवतरित हुए हैं।

