इतनी है सब ठौर हमारी - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (106)

इतनी है सब ठौर हमारी - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (106)

इतनी है सब ठौर हमारी ।
वृंदावन जमुना गोवर्धन राधाकुंड सुखकारी ।। [1]
नंदगाँव बरसानौ है जहां रहत श्याम की प्यारी ।
इनहैं छाँड़ि नहिं जाऊँ अनत कहुँ यह नागर जिय धारी ।। [2]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (106)

हमारी ठौर [निवास स्थल] इतनी ही है: वृंदावन, यमुना, गोवर्धन, राधाकुंड इत्यादि जो हृदय को सुख देने वाली है । [1]

नंदगाँव और बरसाना जहां श्री श्याम सुंदर की प्यारी श्री राधा का निवास है । श्री नागरी दास जी कहते हैं कि मेरा प्रण है कि ब्रज धाम की इन लीला स्थलों को त्याग कर मैं अन्यत्र कहीं भी नहीं जाऊँगा। [2]