श्रृङ्गाररससर्वस्वं शिखिपिच्छविभूषणम् - श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (62)

श्रृङ्गाररससर्वस्वं शिखिपिच्छविभूषणम् - श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (62)

श्रृङ्गाररससर्वस्वं शिखिपिच्छविभूषणम् । 
अङ्गीकृतनराकारमाश्रये भुवनाश्रयम् ।।
- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (63)

(समस्त) भुवनों के आश्रय (श्रीकृष्ण) का मैं आश्रय लेता हूं जो श्रृंगार रस के सर्वस्व हैं, जिन्होंने मोरपंख का भूषण धारण कर रखा है और जिन्होंने पुरुष के आकार को ग्रहण कर रखा है ।