पदयोः प्रविलाप्य यावकं - वृषभानुपुर शतक (17)

पदयोः प्रविलाप्य यावकं - वृषभानुपुर शतक (17)

पदयोः प्रविलाप्य यावकं दयितायाः करकञ्जभङ्गिभिः । 
अतिभावगभीरसागरे विनिमग्नोत्रलुठत्यसौ प्रियः ॥ 
- श्री वृषभानुपुर शतक (17), श्री वंशी अली द्वारा रचित 

अपने कर-कमल की भङ्गिमा कलापूर्ण (चातुरी) से अपनी प्रेयसी के चरणों में महावर लगाकर अत्यन्त गम्भीर भाव रूपी सागर में निमग्न प्रियतम श्रीकृष्ण यहाँ (गह्वरवन में) प्रियाचरणों में लोट रहे हैं ।