व्यास सदा हरिजन बड़े - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (55)

व्यास सदा हरिजन बड़े - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (55)

व्यास सदा हरिजन बड़े, जिनकौ हृदय गंभीर।
अपनों सुख चाहत नहीं, हरत पराई पीर॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (55)

श्री हरिराम व्यास कहते हैं— ‘श्री हरि के भक्त सबसे बड़े हैं, क्योंकि उनका हृदय अत्यन्त गंभीर होता है। वे अपने सुख की कभी इच्छा नहीं करते और सदा दूसरों के दुःखों का हरण करते रहते हैं।’