दान गढ़, बरसाना

दान गढ़, बरसाना

स्थान :
दान गढ़ बरसाना के ब्रम्हाचल पर्वत पर श्री राधा रानी मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।

ब्रज की गोपियाँ सदैव दूध दही बेचने इस मार्ग से जाती हैं और रास्ते में नन्दनंदन इन ब्रज गोपिकाओं की मनोकामना पूर्ति हेतु, कहीं न कहीं से, अनायास इनके सामने प्रकट हो जाते हैं। ये गोपियाँ  दूध दही के स्थान पर 'गोविन्द लेहु, लेहु कोऊ गोविन्द' की रट लगाती ब्रज वन बीथियों में पुकारती है। एक दिन, अपनी दिनचर्या अनुसार ये गोपियाँ, दूध-दही की मटकी सिर पर धरे इसी वन पथ से जा रही थीं। अचानक श्री श्यामसुंदर वहां प्रकट हो जाते हैं और गोपियों का रास्ता रोकते हुए उनसे कहते हैं
"हे ब्रज गोपियों, तुम सब कौन हो, तुम प्रतिदिन इस मार्ग से दूध दही ले जाती हो, और कर नहीं देती, महाराज कंदर्प ने मुझे यहाँ कर लेने के लिए नियुक्त किया है, क्या तुम सब को दंड का भय नहीं है"
इसपर गोपियाँ कहती हैं, "हमारी महारानी तो श्री किशोरी जी हैं, यह समस्त ब्रज मंडल हमारी रानी का ही है, जिनके कटाक्ष रुपी बाणों से तुम्हारे महाराज कंदर्प मूर्छित हो जाते हैं। "
यह कहते हुए गोपियाँ श्री किशोरी जी को आगे कर चलने लगी, तभी श्री कृष्ण ने मार्ग रोक कर कहा "यदि तुमने कर नहीं दिया तो महाराज क्रोधित होंगे और तुम सबको दंड का भागी बनना होगा"
इस प्रकार हास्य विनोद के उपरांत दोनों किशोर किशोरी केलिकुञ्ज में क्रीड़ा विलास करने लगे। सारी सहेलियां आनंद में भर गयीं।

इस स्थान पर दान बिहारी मंदिर है
दानवेषधरायैव दध्युपास्याभिलाषिणे ।
राधानिर्भत्सितायैव कृष्णाय सततं नमः ।।

- ब्रज भक्ति विलास