"दिव्यं वृन्दावनं नाम शेषां गस्थं च सर्वदा।
ब्रह्म रूप मिदं देवि सच्चिदानन्द रूपकम् ॥"
- पुरुषार्थ बोधिनी उपनिषध
हे देवि ! वृन्दावन दिव्य ब्रह्म रूप, तथा सच्चिदानन्द स्वरूप है। यह सर्वदा भगवान की आधार शक्ति स्वरूप शेषांग पर स्थित है।
ब्रह्म रूप मिदं देवि सच्चिदानन्द रूपकम् ॥"
- पुरुषार्थ बोधिनी उपनिषध
हे देवि ! वृन्दावन दिव्य ब्रह्म रूप, तथा सच्चिदानन्द स्वरूप है। यह सर्वदा भगवान की आधार शक्ति स्वरूप शेषांग पर स्थित है।

