होनी हो सो हो गई, होनी होई सो होई।
भोग लगै सो पाइए, श्री बिहारी बिहारिनि कौ मुख जोई॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (4)
जो होनी थी वह हो चुकी, और जो होना है वह होकर ही रहेगा; अतः श्री बिहारी-बिहारिन जू के नित्य-विहार-रूपी प्रसाद को ग्रहण कर उनकी नित्य स्मृति [अर्थात् रूप का अखण्ड चिंतन] प्राप्त कर आनन्दित रहिए।
भोग लगै सो पाइए, श्री बिहारी बिहारिनि कौ मुख जोई॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (4)
जो होनी थी वह हो चुकी, और जो होना है वह होकर ही रहेगा; अतः श्री बिहारी-बिहारिन जू के नित्य-विहार-रूपी प्रसाद को ग्रहण कर उनकी नित्य स्मृति [अर्थात् रूप का अखण्ड चिंतन] प्राप्त कर आनन्दित रहिए।

