गौरश्यामं कृपासाध्यं कोटिकन्दर्पसुन्दरम्।
सखीसहस्रं संसेव्यं नमामि श्रीजगद्गुरुम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनी जी ध्यानम (4)
मैं उन दिव्य युगल श्री गौर श्याम [राधा कृष्ण] को प्रणाम करता हूँ जो केवल कृपा साध्य हैं, कोटि-कोटि कंदर्पों से भी सुन्दर हैं एवं जिनकी कोटि-कोटि सखियाँ सेवा में उपस्थित हैं।
सखीसहस्रं संसेव्यं नमामि श्रीजगद्गुरुम्॥
- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनी जी ध्यानम (4)
मैं उन दिव्य युगल श्री गौर श्याम [राधा कृष्ण] को प्रणाम करता हूँ जो केवल कृपा साध्य हैं, कोटि-कोटि कंदर्पों से भी सुन्दर हैं एवं जिनकी कोटि-कोटि सखियाँ सेवा में उपस्थित हैं।

