चटक मटक नित छैल बन - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (48)

चटक मटक नित छैल बन - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (48)

चटक मटक नित छैल बन, तकत चलत चहुँ ओर।
नारायण यह सुधि नहीं, आज मरै कै भोर॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (48)

श्री राधा-कृष्ण के चरणों को भूलकर जो व्यक्ति अपने शरीर का सुन्दर श्रृंगार कर मदमस्त चाल से चारों ओर देखते हुए घूमता फिरता है, वह यह भी भूल जाता है कि किस क्षण मृत्यु उपस्थित हो जाए।