भजियैं नंदनंदन-श्रीराधा।
जातें जनम-मरन पुनि-पुनि यह, मिटत मोह भव बाधा॥ [1]
श्रीवृन्दावन धाम मनोहर, निशि-दिन पुजवै साधा।
जैश्रीकमलनैंन हित निरखि हरषि उर, गुन-गन निगम अगाधा॥ [2]
- श्री हित कमल नैंन, श्री हित कमल नैंन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (206.6)
श्री हित कमल नैन जी कहते हैं कि हे मन नित्य ही श्री राधा कृष्ण का भजन कर, जो संसार का मोह एवं पुनः जनम मरण की बाधा को मिटाने वाला है।" [1]
श्री वृन्दावन धाम मनोहर है जिसकी कृपा से हृदय में श्री श्यामाश्याम की दिव्य लीलाओं का नित्य प्रादुर्भाव होता है एवं ह्रदय हर्षोलसित हो उठता है, जिनका गुण गान करने में श्रुतियाँ भी असमर्थ हैं। [2]
जातें जनम-मरन पुनि-पुनि यह, मिटत मोह भव बाधा॥ [1]
श्रीवृन्दावन धाम मनोहर, निशि-दिन पुजवै साधा।
जैश्रीकमलनैंन हित निरखि हरषि उर, गुन-गन निगम अगाधा॥ [2]
- श्री हित कमल नैंन, श्री हित कमल नैंन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (206.6)
श्री हित कमल नैन जी कहते हैं कि हे मन नित्य ही श्री राधा कृष्ण का भजन कर, जो संसार का मोह एवं पुनः जनम मरण की बाधा को मिटाने वाला है।" [1]
श्री वृन्दावन धाम मनोहर है जिसकी कृपा से हृदय में श्री श्यामाश्याम की दिव्य लीलाओं का नित्य प्रादुर्भाव होता है एवं ह्रदय हर्षोलसित हो उठता है, जिनका गुण गान करने में श्रुतियाँ भी असमर्थ हैं। [2]

