वृन्दावन सत जो कहै, सुनि है नीकी भाँति।
निसिदिन तेहि उर जगमगै, वृन्दावन की काँति॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (105)
जो कोई इस वृन्दावन-शत-लीला को भावपूर्वक कहेगा अथवा सुनेगा, उसके हृदय में वृन्दावन का प्रकाश सदा झिलमिलाता रहेगा।
निसिदिन तेहि उर जगमगै, वृन्दावन की काँति॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (105)
जो कोई इस वृन्दावन-शत-लीला को भावपूर्वक कहेगा अथवा सुनेगा, उसके हृदय में वृन्दावन का प्रकाश सदा झिलमिलाता रहेगा।

