देस विदेश भिखारिया, जहाँ जाइ तहाँ भीख।
श्री वृन्दावन कन कौर बिनु, बैकुंठ हूँ दुभीख॥
- श्री बिहारिन देव, श्री बिहारी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (31)
भिखारी की भाँति विषयों के लिए देश-विदेश भटकने से भीखरूपी दुःख ही प्राप्त होगा और श्री वृन्दावन की रज का सेवन किए बिना बैकुण्ठ की प्राप्ति भी दुःख देने वाली भीख के समान है। अर्थात् श्री वृन्दावन के रजोपासक रसिक संत के लिए संसार का समस्त वैभव—यहाँ तक कि बैकुण्ठ-धाम का वास भी—दुःखप्रद है; उनका एकमात्र विश्राम तो श्री वृन्दावन की में रज ही है।
श्री वृन्दावन कन कौर बिनु, बैकुंठ हूँ दुभीख॥
- श्री बिहारिन देव, श्री बिहारी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (31)
भिखारी की भाँति विषयों के लिए देश-विदेश भटकने से भीखरूपी दुःख ही प्राप्त होगा और श्री वृन्दावन की रज का सेवन किए बिना बैकुण्ठ की प्राप्ति भी दुःख देने वाली भीख के समान है। अर्थात् श्री वृन्दावन के रजोपासक रसिक संत के लिए संसार का समस्त वैभव—यहाँ तक कि बैकुण्ठ-धाम का वास भी—दुःखप्रद है; उनका एकमात्र विश्राम तो श्री वृन्दावन की में रज ही है।

