(कवित्त)
जिनकी उपासना करत कोटि विष्णु लोक,
ऐसी कमलाहू करे अर्चना विचारी है। [1]
इन्द्र इन्द्राणी औ भवानी श्री ब्रह्माणी आदि,
सबही को आप वरदान देनहारी है॥ [2]
रिद्धि सिद्धि भुक्ति मुक्तिदायक पदारविन्द,
अंगुरी नखन ज्योति ब्रह्म अवतारी है। [3]
राधे जू कृपाकटाक्ष मोपर करोगी कब,
आये हम स्वामिनीजू शरण तिहारी है॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
कोटि-कोटि विष्णुलोक के निवासियों द्वारा श्री श्यामा जू की उपासना अनवरत रूप से की जाती है, और स्वयं श्री लक्ष्मी यह चिंतन करते हुए उनकी अर्चना में निमग्न रहती हैं कि श्री राधारानी के चरणारविंदों की सेवा से ही परिपूर्णता प्राप्त होती है। [1]
न केवल इंद्र, शिव और ब्रह्मा अपितु इन्द्राणी, पार्वती और सरस्वती जैसी परम देवियां भी श्री राधारानी से कृपादृष्टि एवं वरदान प्राप्त करने की कामना करती हैं। [2]
श्री श्यामा जू के चरण-कमल रिद्धि, सिद्धि, भुक्ति और मोक्ष के अद्वितीय प्रदाता हैं। उनके चरण नखों से ही ब्रह्म तत्व का परम प्रकाश प्रस्फुटित हुआ है। [3]
हे श्री राधे जू! मैं आपकी शरणागत होकर उपस्थित हुआ हूँ। कृपा कर यह बताइए, वह शुभ क्षण कब आएगा जब आपकी कृपामयी दृष्टि मुझ पर प्रसारित होगी? [4]
जिनकी उपासना करत कोटि विष्णु लोक,
ऐसी कमलाहू करे अर्चना विचारी है। [1]
इन्द्र इन्द्राणी औ भवानी श्री ब्रह्माणी आदि,
सबही को आप वरदान देनहारी है॥ [2]
रिद्धि सिद्धि भुक्ति मुक्तिदायक पदारविन्द,
अंगुरी नखन ज्योति ब्रह्म अवतारी है। [3]
राधे जू कृपाकटाक्ष मोपर करोगी कब,
आये हम स्वामिनीजू शरण तिहारी है॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
कोटि-कोटि विष्णुलोक के निवासियों द्वारा श्री श्यामा जू की उपासना अनवरत रूप से की जाती है, और स्वयं श्री लक्ष्मी यह चिंतन करते हुए उनकी अर्चना में निमग्न रहती हैं कि श्री राधारानी के चरणारविंदों की सेवा से ही परिपूर्णता प्राप्त होती है। [1]
न केवल इंद्र, शिव और ब्रह्मा अपितु इन्द्राणी, पार्वती और सरस्वती जैसी परम देवियां भी श्री राधारानी से कृपादृष्टि एवं वरदान प्राप्त करने की कामना करती हैं। [2]
श्री श्यामा जू के चरण-कमल रिद्धि, सिद्धि, भुक्ति और मोक्ष के अद्वितीय प्रदाता हैं। उनके चरण नखों से ही ब्रह्म तत्व का परम प्रकाश प्रस्फुटित हुआ है। [3]
हे श्री राधे जू! मैं आपकी शरणागत होकर उपस्थित हुआ हूँ। कृपा कर यह बताइए, वह शुभ क्षण कब आएगा जब आपकी कृपामयी दृष्टि मुझ पर प्रसारित होगी? [4]

