जौ चाहत है नित्त सुख - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (38)

जौ चाहत है नित्त सुख - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (38)

जौ चाहत है नित्त सुख, अरु मन कौ विश्राम।
'हित धुव्र' हित सौं भजत रहि, पलु-पलु श्यामा श्याम॥

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (38)

श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि यदि तुम सदैव सुख और शांति चाहते हो, तो प्रतिपल प्रीतिपूर्वक श्री श्यामा-श्याम का भजन करते रहो।