(राग ईमन / कल्याण)
राधिका वल्लभ प्यारी, सहजहि सुकुँवारी,
अंग-अंग गुन निधि रूप रासि रस की। [1]
सलज सुरंग सित असित दीरघ दृग,
चितवनि सहजहिं सुखद सरस की॥ [2]
सारी नील रही फबि भूषन झलक छबि,
हरै दुति दामिनी अरु भान कोटि-दस की। [3]
प्रीतम किसोर जू के लोइनि चकोर भए,
चितवत 'हित ध्रुव' सोभा नख-ससि की॥ [4]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (39)
प्रियतम श्री लाल जी की प्रिया श्री राधा सहज ही अङ्ग-प्रत्यङ्ग कोमलाङ्गी, गुणों की भण्डार तथा रस एवं रूप की राशि हैं। [1]
उनके सुदीर्घ नयन सलज्ज तो हैं ही श्वेत, श्याम और रतनारे भी है, जिनकी सहज चितवन रसूपर्ण एवं सुखद है। [2]
प्रिया के श्री अङ्ग पर नील-वर्ण की साड़ी फब रही है। अङ्गों में धारण किये हुए भूषणों की छवि विद्युल्लता की दुति एवं दस कोटि सूर्यो की कान्ति हरण कर रही है। [3]
श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि प्रिया के नखचन्द्र की शोभा देखकर किशोर प्रियतम श्रीलाल जी के नेत्र चकोर हो रहे हैं।[4]
राधिका वल्लभ प्यारी, सहजहि सुकुँवारी,
अंग-अंग गुन निधि रूप रासि रस की। [1]
सलज सुरंग सित असित दीरघ दृग,
चितवनि सहजहिं सुखद सरस की॥ [2]
सारी नील रही फबि भूषन झलक छबि,
हरै दुति दामिनी अरु भान कोटि-दस की। [3]
प्रीतम किसोर जू के लोइनि चकोर भए,
चितवत 'हित ध्रुव' सोभा नख-ससि की॥ [4]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (39)
प्रियतम श्री लाल जी की प्रिया श्री राधा सहज ही अङ्ग-प्रत्यङ्ग कोमलाङ्गी, गुणों की भण्डार तथा रस एवं रूप की राशि हैं। [1]
उनके सुदीर्घ नयन सलज्ज तो हैं ही श्वेत, श्याम और रतनारे भी है, जिनकी सहज चितवन रसूपर्ण एवं सुखद है। [2]
प्रिया के श्री अङ्ग पर नील-वर्ण की साड़ी फब रही है। अङ्गों में धारण किये हुए भूषणों की छवि विद्युल्लता की दुति एवं दस कोटि सूर्यो की कान्ति हरण कर रही है। [3]
श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि प्रिया के नखचन्द्र की शोभा देखकर किशोर प्रियतम श्रीलाल जी के नेत्र चकोर हो रहे हैं।[4]

