रसिक श्याम की जो सदा - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (9.1)

रसिक श्याम की जो सदा - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (9.1)

रसिक श्याम की जो सदा, रसमय जीवन मूरी।
ता पद पंकज की सतत, बन्दौ पावन धूरी॥

- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (9.1)

श्री राधारानी के चरण-कमल, जो रसिक-शेखर श्रीकृष्ण के जीवन-मूल हैं, मैं सदा उनकी रज की वंदना करता हूँ।