(राग आसावरी, तीन ताल)
धन-धन प्यारौ राधा नाम।
आठों याम हृदय धरि देखो,
उर आवे घनश्याम॥ [1]
जाकि महिमा पै सब वारौं,
कोटि रमा रतिकाम।
श्री राधा गोपाल हरि हित,
निज नयना अभिराम॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (75)
प्यारौ श्री राधा नाम धन्य धन्य (परम पूजनीय) है। इस दिव्य श्री राधा नाम को जब जीव आठों याम हृदय से धारण कर लेता है तब सहज ही श्याम सुंदर का हृदय में प्रादुर्भाव हो जाता है। [1]
इस श्री राधा नाम की इतनी अधिक महिमा है कि इसके समक्ष कोटि कोटि रमा, रति एवं कामदेव को न्योछावर कर देना चाहिए। इस राधा नाम के प्रभाव से मेरे नयन श्री राधा कृष्ण के प्रेम में प्रफुल्लित हो रहे हैं। [2]
धन-धन प्यारौ राधा नाम।
आठों याम हृदय धरि देखो,
उर आवे घनश्याम॥ [1]
जाकि महिमा पै सब वारौं,
कोटि रमा रतिकाम।
श्री राधा गोपाल हरि हित,
निज नयना अभिराम॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (75)
प्यारौ श्री राधा नाम धन्य धन्य (परम पूजनीय) है। इस दिव्य श्री राधा नाम को जब जीव आठों याम हृदय से धारण कर लेता है तब सहज ही श्याम सुंदर का हृदय में प्रादुर्भाव हो जाता है। [1]
इस श्री राधा नाम की इतनी अधिक महिमा है कि इसके समक्ष कोटि कोटि रमा, रति एवं कामदेव को न्योछावर कर देना चाहिए। इस राधा नाम के प्रभाव से मेरे नयन श्री राधा कृष्ण के प्रेम में प्रफुल्लित हो रहे हैं। [2]

![धन-धन प्यारौ राधा नाम - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (75)](https://images.brajrasik.org/60bce8c47f75e9000a5a4c57-m.jpeg)