छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला - ताज बीबी

छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला - ताज बीबी

(कवित्त)
छैल जो छबीला, सब रंग में रंगीला
बड़ा चित्त का अड़ीला, कहूं देवतों से न्यारा है। [1]
माल गले सोहै, नाक-मोती सेत जो है कान,
कुण्डल मन मोहै, लाल मुकुट सिर धारा है॥ [2]
दुष्टजन मारे, सब संत जो उबारे ताज,
चित्त में निहारे प्रन, प्रीति करन वारा है। [3]
नन्दजू का प्यारा, जिन कंस को पछारा,
वह वृन्दावन वारा, कृष्ण साहेब हमारा है॥ [4]

- ताज बीबी

वह अत्यंत छबीला है, सभी कलाओं में निपुण और चतुर शिरोमणि है। उसका चित्त से अड़ीला होना ही उसे अन्य देवताओं में न्यारा बनाता है। [1]

जिसके गले में सुंदर माला शोभा पा रही है, नासिका पर मोती का आभूषण है, कानों में आकर्षक कुण्डल झूल रहे हैं, और सिर पर सुशोभित मुकुट दमक रहा है। [2]

जिसने सभी दुष्टों का संहार किया और संतजनों की रक्षा की है । वह प्रेम का साक्षात स्वरूप है और हृदय के गहन भावों को जानने वाला है। [3]

ताज बीबी कहती हैं, "वह श्री नंद जी का लाडला पुत्र है जिसने क्रूर कंस का उद्धार किया है । वह सदैव वृंदावन में विराजमान रहता है, जिसका नाम कृष्ण है और वही मेरा आराध्य है।" [4]