बंक बिलोचन हंसनि मुरि - श्री रसखान

बंक बिलोचन हंसनि मुरि - श्री रसखान

बंक बिलोचन हंसनि मुरि, मधुर बैन रसखानि।
मिले रसिक रसराज दोउ, हरखि हिये रसखानि॥

- श्री रसखान

तिरछे नेत्रों से देखकर मुस्कुराते और मधुर वचन बोलते हुए इस प्रकार रसिक और रसराज—अर्थात् श्रीकृष्ण और श्रीराधा—मिले कि उनकी युगल-छवि को देखकर मन आनन्दित हो उठा।