मन तौ चंचल सबनि ते - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (14)

मन तौ चंचल सबनि ते - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (14)

मन तौ चंचल सबनि तें, कीजै कौन उपाइ।
साधन कौ हरि भजन है, कै सत्संग सहाई॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (14)

यह मन सबसे अधिक चंचल है। इसकी चंचलता के निवारण के लिए कौन सा उपाय किया जाए? इस साधन के लिए केवल दो ही मार्ग सहायक हैं: या तो निरंतर श्री हरि का भजन किया जाए, या फिर सत्संग का आश्रय लिया जाए।