कोऊ कोरिक संग्रहौ, कोऊ लाख हजार। मो सम्पति जदुपति सदा, बिपति-बिदारनहार॥ - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई कोई हजारों, लाखों या करोड़ों की सम्पत्ति संग्रह करे; किन्तु मेरी सम्पत्ति तो सदा वही ‘विपत्तियों का नाश करने वाले’ यदुनाथ [श्रीकृष्ण] हैं।