(राग विहागरौ)
रंगीली श्रीराधा भामिनी ।
महल-निकुंज अंक प्रीतम के जैसे घन अरु दामिनी ।। [1]
तेरे विमल चंद नख पद पर वारों कोटिक कामिनी ।
वृंदावन नित्य रसिक बिहारनि रूप सखी की स्वामिनी ।। [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (504)
रंगीली श्री राधा भामिनी निकुंज महल में श्री प्रीतम के अंक से अंकित घन और दामिनी के समान अति सुशोभित लग रही हैं । [1]
अनंत अनंत कोटि कामिनियों को श्री राधा के विमल नख पद पर नयौछावर कर देना चाहिए। श्री रूप सखी कहते हैं कि वृंदावन में नित्य विहार कर रसिकों को रस बरसाने वाली श्री राधा ही मेरी स्वामिनी हैं । [2]

