चलो सखी वहाँ जाइये जहाँ बसें बृजराज - ब्रज के दोहे

चलो सखी वहाँ जाइये जहाँ बसें बृजराज - ब्रज के दोहे

चलो सखी वहाँ जाइये, जहाँ बसें बृजराज।
गोरस बेचन हरि मिले, एक पंथ दो काज॥
- ब्रज के दोहे 

आओ सखी, चलो वहाँ चलते हैं जहाँ ब्रजराज श्रीकृष्ण का निवास है। हम अपने गोरस (दुग्ध-उत्पाद) बेचेंगे और श्रीकृष्ण से भी मिलेंगे—इस प्रकार एक ही मार्ग से दो उद्देश्य पूर्ण हो जाएँगे।