कदाहं यमुना-तीरे नामानि तव कीर्तयन्।
उद्बाष्पः पुण्डरीकाक्ष रचयिष्यामि ताण्डवम्॥
- श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.156)
हे कमल नेत्रों वाले भगवान कृष्ण, ऐसा कब होगा कि मैं वृंदावन में यमुना किनारे आपका कीर्तन गाते हुए आखों में आँसु भरकर नृत्य करूँगा?
उद्बाष्पः पुण्डरीकाक्ष रचयिष्यामि ताण्डवम्॥
- श्री रूप गोस्वामी, भक्ति रसामृत सिंधु (1.2.156)
हे कमल नेत्रों वाले भगवान कृष्ण, ऐसा कब होगा कि मैं वृंदावन में यमुना किनारे आपका कीर्तन गाते हुए आखों में आँसु भरकर नृत्य करूँगा?

