(राग देश)
युगल छबि देखि मेरो हियरा सिरात।
नींद भरे चलत झूमि के, शिथिल भये सब गात॥ [1]
कह्यो चहत कछु कढ़त कछू मुख, कहत कहत रहि जात।
नारायण या विधि निकुंज में, पहुँचे अति अलसात॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (3)
श्री नारायण स्वामी सखी भाव में एक सखी से कहते हैं "हे सखी, युगल किशोर श्यामाश्याम नींद से भरे हुए झूमते हुए चल रहे हैं, अंग-अंग शिथिल हो गए हैं, इनकी यह छवि देख मेरा ह्रदय शीतल हो रहा है।" [1]
श्री कुञ्ज बिहारी बिहारिनि कहना कुछ चाहते हैं लेकिन मुख कमल से कुछ और ही निकल रहा है, इस प्रकार दोनों नित्य किशोर अति आलस युक्त निकुञ्ज भवन में प्रवेश करते हैं। [2]
युगल छबि देखि मेरो हियरा सिरात।
नींद भरे चलत झूमि के, शिथिल भये सब गात॥ [1]
कह्यो चहत कछु कढ़त कछू मुख, कहत कहत रहि जात।
नारायण या विधि निकुंज में, पहुँचे अति अलसात॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, शयन लीला (3)
श्री नारायण स्वामी सखी भाव में एक सखी से कहते हैं "हे सखी, युगल किशोर श्यामाश्याम नींद से भरे हुए झूमते हुए चल रहे हैं, अंग-अंग शिथिल हो गए हैं, इनकी यह छवि देख मेरा ह्रदय शीतल हो रहा है।" [1]
श्री कुञ्ज बिहारी बिहारिनि कहना कुछ चाहते हैं लेकिन मुख कमल से कुछ और ही निकल रहा है, इस प्रकार दोनों नित्य किशोर अति आलस युक्त निकुञ्ज भवन में प्रवेश करते हैं। [2]

