वृन्दावनं गोवर्धनं यमुनापुलिनानि च।
वीक्ष्यासीदुत्तमा प्रीती राममाधवयोर्नृप॥
- श्रीमद भागवतम् (10.11.36)
हे परीक्षित, जब बलराम एवं कृष्ण ने वृंदावन, गोवर्धन एवं यमुना को निहारा, तब उन दोनों का मन प्रेम से परिपूर्ण हो उठा।
वीक्ष्यासीदुत्तमा प्रीती राममाधवयोर्नृप॥
- श्रीमद भागवतम् (10.11.36)
हे परीक्षित, जब बलराम एवं कृष्ण ने वृंदावन, गोवर्धन एवं यमुना को निहारा, तब उन दोनों का मन प्रेम से परिपूर्ण हो उठा।

