अब तो कृपा करो सब संत - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (99)

अब तो कृपा करो सब संत - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (99)

अब तो कृपा करो सब संत।
या तन मन सौं भ्रमत भ्रमत ही ह्वै गये दिवस अनन्त॥
घटत बुद्धि बल देह दिनहि दिन तृष्णा को नहिं अन्त।
नागरिया अब उहाँ बसइयै जिहिं ठां नित्य बसन्त॥

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (99)

श्री नागरीदास जी समस्त संतों से प्रार्थना कर रहे हैं की "हे समस्त संत जनों, इस शरीर और मन में अहम् बुद्धि के भ्रम से भटकते हुए अनंत जीवन बीत गए, अब तो कृपा कीजिये।" [1]

मेरे शरीर एवं बुद्धि का सामर्थ्य दिन पर दिन घट रहा है लेकिन मेरी तृष्णा दिन पर दिन बढ़ती जा रही है, अब तो कृपा कर मुझे उस नित्य धाम (वृन्दावन) का वास प्रदान कीजिये जहाँ नित्य ही वसंत ऋतु है।" [2]