बहु विधि पूजा दान व्रत, करत गरब के साथ।
नारायण बिन दीनता, द्रवैं न दीनानाथ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (57)
यदि अहंकार सहित बहुत विधि-विधान से पूजा, दान और व्रत आदि भी किए जाएँ, तो भी बिना दीनता के दीनानाथ (श्री हरि) कभी प्रसन्न नहीं होते।
नारायण बिन दीनता, द्रवैं न दीनानाथ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (57)
यदि अहंकार सहित बहुत विधि-विधान से पूजा, दान और व्रत आदि भी किए जाएँ, तो भी बिना दीनता के दीनानाथ (श्री हरि) कभी प्रसन्न नहीं होते।

