तुष्ट पुष्ट तासौं रहैं - श्री भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (8)

तुष्ट पुष्ट तासौं रहैं - श्री भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (8)

तुष्ट पुष्ट तासौं रहैं, जरा न ब्यापै रोग।
बाल अवस्था जुवा पुनि, तिनकौ करैं न भोग॥

- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (8)

नित्य-विहार की इस दिव्य जोड़ी (श्री राधा-कृष्ण) को न तो बुढ़ापा स्पर्श करता है और न ही कोई रोग। ये दोनों कभी बाल्य या यौवनावस्था का भोग नहीं करते; ये सदा नित्य-किशोर ही रहते हैं।