मयि प्रसादं मधुरैः कटाक्ष - श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (29)

मयि प्रसादं मधुरैः कटाक्ष - श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (29)

मयि प्रसादं मधुरैः कटाक्षैर्वशीनिनादानुचरैर्विधेहि।
त्वयि प्रसन्ने किमिहापरैर्नस्त्वय्यप्रसन्ने किमिहापरैर्नः॥

- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (29)

हे श्रीकृष्ण ! वंशी के नाद के अनुचर मधुर कटाक्षों से मुझ पर कृपा करो। तुम्हारे प्रसन्न होने पर इस संसार में दूसरे विषयों से क्या प्रयोजन है ? तुम्हारे अप्रसन्न होने पर इस संसार में दूसरे विषयों से क्या प्रयोजन है ?