व्यास कनक अरु कामिनी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (106)

व्यास कनक अरु कामिनी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (106)

व्यास कनक अरु कामिनी, तजियै भजियै दूरी।
हरिसौं अंतर पारिहैं, मुख दै जैहैं धूरि॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (106)

कनक (धन) और कामिनी (सुन्दर स्त्री) की इच्छा से बचना चाहिए और उससे दूर भागना चाहिए, क्योंकि यह इतनी प्रबल है कि निश्चित ही श्री हरि के भजन में विक्षेप उत्पन्न कर, हृदय को भक्ति-हीन बना सकती है।