आप ही मखेश्वरी क्रियेश्वरी स्वधेश्वरी है - श्री जयरामदेव

आप ही मखेश्वरी क्रियेश्वरी स्वधेश्वरी है - श्री जयरामदेव

(कवित्त)
आप ही मखेश्वरी क्रियेश्वरी स्वधेश्वरी है,
देवे सी त्रिवेद भारतीश्वरी अधारी है। [1]
आप ही प्रमाण शासनेश्वरी रमेश्वरी है,
क्षमेसी प्रमोद काननेश्वरी निहारी है॥ [2]
कवि जय रामदेव ऐसी श्री बृजेश्वरी के,
चरणन कोटि-कोटि वन्दना हमारी है। [3]
राधे जू कृपाकटाक्ष मोपर करोगी कब,
आये हम स्वामिनीजू शरण तिहारी है॥ [4]
- श्री जयरामदेव

हे श्री राधा, आप ही मखेश्वरी, क्रियेश्वरी एवं स्वधेश्वरी हैं तथा आप ही समस्त देवी-देवताओं समेत वेदों की आधार हैं। [1]

आप ही तीनों लोकों की शासक हैं, पतितों को क्षमा करनेवाली हैं, एवं आप ही के एक अंश से लक्ष्मी, पार्वती एवं सरस्वती देवी का प्राकट्य होता है। [2]

श्री जय रामदेव जी कहते हैं "ऐसी हमारी ब्रज की महारानी श्री राधा के चरण कमलों में मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।" [3]

हे श्री राधे, मैं आपके शरण में आया हूँ, कब आप मुझपर कृपा करोगी। [4]