राधा हरि हरि राधिका, बनि आए संकेत।
दम्पति रति-बिपरीत-सुखु, सहज सुरत हूँ लेत॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (343)
गुप्त मिलन-स्थल पर श्री राधा और श्रीकृष्ण ने परस्पर रूप धारण किया—श्री राधा ने कृष्ण का रूप धारण किया और श्रीकृष्ण ने राधा का। इस प्रकार रूप-परिवर्तन के कारण स्वाभाविक समागम में दोनों दम्पति विपरीत-रति का सुख अनुभव कर रहे हैं।
दम्पति रति-बिपरीत-सुखु, सहज सुरत हूँ लेत॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (343)
गुप्त मिलन-स्थल पर श्री राधा और श्रीकृष्ण ने परस्पर रूप धारण किया—श्री राधा ने कृष्ण का रूप धारण किया और श्रीकृष्ण ने राधा का। इस प्रकार रूप-परिवर्तन के कारण स्वाभाविक समागम में दोनों दम्पति विपरीत-रति का सुख अनुभव कर रहे हैं।

