प्रात: स्मरामि युग-केलिरसाभिषिक्तं, वृन्दावनं सुरमणीयमुदारवृक्षम्।
सौरीप्रवाह वृतमात्मगुणप्रकाशं, युग्मांघ्रिरेणुकणिकाञ्चितसर्वसत्त्वम्॥
- जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्त्रोत (1)
नित्यनिकुञ्जबिहारी युगलकिशोर श्री राधा कृष्ण के परम दिव्य लीलाविहार केलि रस से अभिषिक्त तथा कलिन्दतनया श्रीयमुना के गम्भीर धारा प्रवाह से सर्वदा समन्वित एवं अपने दिव्यातिदिव्य लोकोत्तर अनिर्वचनीय गुण समूह से प्रकाशमान, श्री युगल प्रिया-प्रियतम के ललित चरणारर्विन्द रज रेणु कणिका से जहां के समस्त प्राणीमात्र परम पवित्र हैं ऐसे कल्पवृक्ष स्वरूप परम सुंदर परम रमणीय श्री वृन्दावन धाम का मैं प्रात:काल स्मरण करता हूँ।
सौरीप्रवाह वृतमात्मगुणप्रकाशं, युग्मांघ्रिरेणुकणिकाञ्चितसर्वसत्त्वम्॥
- जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्त्रोत (1)
नित्यनिकुञ्जबिहारी युगलकिशोर श्री राधा कृष्ण के परम दिव्य लीलाविहार केलि रस से अभिषिक्त तथा कलिन्दतनया श्रीयमुना के गम्भीर धारा प्रवाह से सर्वदा समन्वित एवं अपने दिव्यातिदिव्य लोकोत्तर अनिर्वचनीय गुण समूह से प्रकाशमान, श्री युगल प्रिया-प्रियतम के ललित चरणारर्विन्द रज रेणु कणिका से जहां के समस्त प्राणीमात्र परम पवित्र हैं ऐसे कल्पवृक्ष स्वरूप परम सुंदर परम रमणीय श्री वृन्दावन धाम का मैं प्रात:काल स्मरण करता हूँ।

