वैष्णवानन्दकोटिर्वा ब्रह्मानन्दादि कोटयः ।
मया ते पदनखज्योतिः कणान्निर्मञ्च्छनी कृता ।।
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (38)
हे राधे ! कोटि-कोटि वैष्णवानन्द और कोटि-कोटि ब्रह्मानन्दादि भी मेरे द्वारा आपकी पदनखच्छटा के एक कण पर ही न्यौछावर कर दिये गये या मैं उन्हें न्यौछावर करती हूँ।
मया ते पदनखज्योतिः कणान्निर्मञ्च्छनी कृता ।।
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (38)
हे राधे ! कोटि-कोटि वैष्णवानन्द और कोटि-कोटि ब्रह्मानन्दादि भी मेरे द्वारा आपकी पदनखच्छटा के एक कण पर ही न्यौछावर कर दिये गये या मैं उन्हें न्यौछावर करती हूँ।

