एक वेर राधा रमण, कहै प्रेम से जोय।
पातक कोटिक जन्म के, भस्म तुरत ही होय॥
- ब्रज के दोहे
यदि कोई एक बार भी प्रेम से ‘राधा-रमण’ कहता है, तो उसके अनन्त-कोटि जन्मों के अपराध उसी क्षण भस्म हो जाते हैं।
पातक कोटिक जन्म के, भस्म तुरत ही होय॥
- ब्रज के दोहे
यदि कोई एक बार भी प्रेम से ‘राधा-रमण’ कहता है, तो उसके अनन्त-कोटि जन्मों के अपराध उसी क्षण भस्म हो जाते हैं।

