अस अद्भुत गोपाल लाल, सब काल बसत जहँ।
याहि तें वैकुंठ विभव, कुंठित लागत तहँ॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (37)
ऐसे अद्भुत प्रियतम गोपाल लाल (श्री कृष्ण) जहाँ सर्वदा निवास करते हैं, उस वृन्दावन के सामने वैकुण्ठ का ऐश्वर्य भी फीका (कुंठित) प्रतीत होता है।
याहि तें वैकुंठ विभव, कुंठित लागत तहँ॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (37)
ऐसे अद्भुत प्रियतम गोपाल लाल (श्री कृष्ण) जहाँ सर्वदा निवास करते हैं, उस वृन्दावन के सामने वैकुण्ठ का ऐश्वर्य भी फीका (कुंठित) प्रतीत होता है।

