(राग जयजयवन्ती)
स्याम सलोनो प्यारो नंद जीउ को नागरु
जगत उजागर प्यारी चाहत कुंजन मै । [1]
रटत रहत राधा पल सों न लागे पलु
काहे कों मुनि ले बैसी अपुने भवन मै ॥ [2]
करहु तुमारी सोंस उन के मन की सभ
सुधि बुधि हिरि लीनी कंचन से तन मै । [3]
केवलजन लडेती मानु तजि बेगि मिलु
धारो चितु बलि जावो पीय के गवन मै ॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (65)
हे श्री राधे! प्यारो नंदलाल श्री कृष्ण आपकी प्रतीक्षा में रात भर जाग रहे हैं एवं व्याकुलता से वृंदावन की कुंजों में आपकी राह निहार रहे हैं । [1]
प्रियतम हर क्षण अपलक नेत्रों से “राधा" नाम रट रहे हैं, आप मौन धारण कर यहाँ अपने भवन में क्यों विराजमान हैं ? [2]
मैं आपकी शपथ लेकर कहता हूँ कि आपकी कंचन सी छवि ने प्रियतम के मन की सुधि बुधि को हर लिया है । [3]
श्री केवलराम कहते हैं, "हे लड़ैती जू! आप अपने मान को जल्द ही त्याग कर अपने प्रियतम श्याम सुंदर से मिलकर, अपना सर्वसव उनके आने पर नयौछावर कर दीजिए"। [4]
स्याम सलोनो प्यारो नंद जीउ को नागरु
जगत उजागर प्यारी चाहत कुंजन मै । [1]
रटत रहत राधा पल सों न लागे पलु
काहे कों मुनि ले बैसी अपुने भवन मै ॥ [2]
करहु तुमारी सोंस उन के मन की सभ
सुधि बुधि हिरि लीनी कंचन से तन मै । [3]
केवलजन लडेती मानु तजि बेगि मिलु
धारो चितु बलि जावो पीय के गवन मै ॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (65)
हे श्री राधे! प्यारो नंदलाल श्री कृष्ण आपकी प्रतीक्षा में रात भर जाग रहे हैं एवं व्याकुलता से वृंदावन की कुंजों में आपकी राह निहार रहे हैं । [1]
प्रियतम हर क्षण अपलक नेत्रों से “राधा" नाम रट रहे हैं, आप मौन धारण कर यहाँ अपने भवन में क्यों विराजमान हैं ? [2]
मैं आपकी शपथ लेकर कहता हूँ कि आपकी कंचन सी छवि ने प्रियतम के मन की सुधि बुधि को हर लिया है । [3]
श्री केवलराम कहते हैं, "हे लड़ैती जू! आप अपने मान को जल्द ही त्याग कर अपने प्रियतम श्याम सुंदर से मिलकर, अपना सर्वसव उनके आने पर नयौछावर कर दीजिए"। [4]

