यदि दुर्व्वाच्यसहस्रं यदि च त्रुकचेन दीर्यते देहः - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.93)

यदि दुर्व्वाच्यसहस्रं यदि च त्रुकचेन दीर्यते देहः - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.93)

यदि दुर्व्वाच्यसहस्रं यदि च त्रुकचेन दीर्यते देहः।
दुष्कर्मकोटयो यदि तदपि न राधाप्रियवनं जह्याम्॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.93)

यदि सहस्रों दुर्वचन सहन करने पड़े, यदि कोई इस देह को दरांत द्वारा विदीर्ण ही क्यों न कर दे, कोटि-कोटि दुष्कर्म भी यदि सहने पड़े तो भी श्रीराधा के प्रियवन श्रीवृन्दावन को मैं त्याग नहीं करूंगा।